जब हम रो पड़ते हैं किसी बात पर फूट-फूट
हम नहीं मना रहे होते हैं दुःख
केवल उसी बात का,
हमारी आँखों से नहीं निकल रहे होते हैं अश्रु
केवल उसी बात से आहत होकर,
हम बहा रहे होते हैं हर वो आँसू
जिसे हमने जबरन रोक रक्खा था गले में
हर उस दुःख के बाद
जिसने कर दिया था हमारे कलेजे को टूक-टूक।
~ सुप्रिया दुबे © (७/३/२०२०)
हम नहीं मना रहे होते हैं दुःख
केवल उसी बात का,
हमारी आँखों से नहीं निकल रहे होते हैं अश्रु
केवल उसी बात से आहत होकर,
हम बहा रहे होते हैं हर वो आँसू
जिसे हमने जबरन रोक रक्खा था गले में
हर उस दुःख के बाद
जिसने कर दिया था हमारे कलेजे को टूक-टूक।
~ सुप्रिया दुबे © (७/३/२०२०)
