मेरे अल्फ़ाज़

हिंदी बिच अंगरेजी है ऐसे
गोभी संग भिंडी हो जैसे..!!

#लिबिर_लिबिर

मेरे अल्फ़ाज़

कवि का एकांत से वैसा ही संबंध है
जैसा गणित का शून्य से..!!

वो बचपन की बातें...



जब मम्मी माथे पर चँदा बनाती थी,
मुझे नींद न आने पर वो थपकी दे सुलाती थी,
वो रात भर जगती थी कि मैं आराम से सोऊँ,
भले ही उसकी नींद अधूरी रह जाती थी,

याद आती हैं वो बचपन की बातें...

पापा का ऐनक पहन मैं खूब इतराती थी,
कुछ शब्दों को बोलने में जबान लड़खड़ाती थी,
वो मेरा खाना खाने में नखरे करना,
और मम्मी का “ये मामा का कौर,ये चाचा का और ये पापा का” कहकर खिलाना,

याद आती हैं वो बचपन की बातें...

वो बारिश की बूँदों में खुद को भिगाना,
बहते हुए पानी में कश्ती पौंराना,
वो गुड्डे और गुड्डी की शादी रचाना,
आँधी में बाग में आम बीनने जाना,

याद आती हैं वो बचपन की बातें...

वो दोस्तों के साथ में ‘आइस पाइस’ खेलना,
पुआल के ढेर में साँस रोके खुद को छुपाना,
बार-बार ‘ब्योमकेश बक्शी’ बनना,
सर पर धप्पे खा रुआँसा हो जाना,
और मुजरिमों के छिपते ही घर भाग जाना,

याद आती हैं वो बचपन की बातें...

जपरकाश काका का कहानियाँ सुनाना,
वो सावन में पोखरे पर गुड़िया पीटने जाना,
किसनौता फूवा का कजरी गाना,
और साथ में मेरा भी सुर में सुर मिलाना,

याद आती हैं वो बचपन की बातें...

वो पंजीरी खाकर के फुफ्फा बोलना,
वो उलझनों से दूर अपनी ही धुन में रहना,
वो ठण्डी में कउड़े में आलू भून खाना,
दिवाली के दीयों से तराजू बनाना,

याद आती हैं वो बचपन की बातें...
                                   
                                                        - सुप्रिया दुबे ©

मेरे अल्फ़ाज़

अपने आप में ही बदलने लगी हूँ मैं
अब थोड़ी ग़ज़लें भी सुनने लगी हूँ मैं!

#रबनेबनादीजोड़ी

पता नहीं लोग दो चार किताबें पढ़ के कैसे इतने सीरियस हो जाते हैं,
मैं तो कितनी भी किताबें पढ़ लूँ कभी सीरियस नहीं हो पाऊँगी सुरेन्दर जी,कभी सीरियस नहीं हो पाऊँगी...

#रबनेबनादीजोड़ी

मेरे अल्फ़ाज़

दिल की बातों को बस कह दिया उनसे
सर दुखने लगा था मेरा सर में रक्खे रक्खे!

मेरे अल्फ़ाज़

यूँ तो ज़ज़्बातों को शब्दों में पिरोना बखूबी आता था मुझे
न जाने आज क्या हो गया था मुझे!

मेरे अल्फ़ाज़

हाथ की इन लकीरों में कहीं तो निशां है तेरा
यूँ ही नहीं आये थे तुम मेरी ज़िंदगी में!

मेरी प्रथम पंक्तियाँ

मेरी आँखों ने देखे हैं ख्वाब कई
दिल को है यकीं ये पूरे होंगे!