मेरे अल्फ़ाज़

तिरे ही मुस्कुराने से फ़िज़ा में फूल खिलते हैं,
तू यूँ ही मुस्कुरा हरदम ही प्यासी तितलियों के लिए !

~ सुप्रिया दूबे ©