मेरे अल्फ़ाज़

सुंदर, प्यारी भाषाओं बिच
मैंने अपनाया है ‛तुझको’
गर ‛तू’ भी मुझको अपना ले
तब जाकर कोई बात बने !

~ सुप्रिया दूबे ©