अगर हमारे एक दिन के 'गप्पों' से वाक्य चुराकर उन वाक्यों को विस्तार दिया जाए तो बन जाएगा एक उपन्यास जिसे पढ़कर लोग लोटपोट हो रहे होंगे !!
~ सुप्रिया दुबे ©