झिझक (लघुकथा)

रात का समय और एक छोटा सा कमरा, जिसमें छत वाला पंखा धीरे-धीरे रेंग रहा है। कमरे में केवल मैं, दीदी और पापा हैं। तीनों खाना खा रहे हैं और साथ में आँख गड़ाए टीवी भी देख रहे हैं। टीवी पर एक न्यूज़ चैनल चल रहा है। ख़बर आती है- “ अयोध्या में योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम की 7 फीट ऊँची मूर्ति का किया अनावरण ”
         सबके चेहरे पर उत्साह और खुशी की लहर दौड़ जाती है। सब राम मंदिर को लेकर अपने-अपने विचार व्यक्त करने लगते हैं। मैं भी बहस में कूदते हुए बोल पड़ती हूँ “ योगी जी सी.एम. बने हैं, अब तो कार्यकाल पूरा होने तक राम मंदिर बन ही जाना चाहिए ”
    सब खाने के साथ-साथ इस खुशख़बरी को पचाने की कोशिश कर ही रहे हैं तभी अगली ख़बर आती है - “ अलीगढ़ में ढाई साल की बच्ची की रेप के बाद नृशंस हत्या... ”
      पापा मुँह में कौर डालते हुए रुक जाते हैं और हड़बड़ाए हुए बोलते हैं - “चैनल बदल दो”  और दीदी झट से दूसरा न्यूज़ चैनल लगा देती हैं...

  -- सुप्रिया दुबे ©