याद तुम्हारी आई

सूर्य हुआ अस्ताचलगामी,
स्मृति-पटल पर उठी सुनामी;
हवा जब चली ठंडी-ठंडी,
हृदय हो उठा मस्त-मलंगी;
पक्षी उड़े नीड़ को अपने,
बादल ने तब ली अँगड़ाई;
लाल हो गया आसमान जब,
मिटने लगी सभी परछाई;
दिये जले तब आँगन-आँगन,
चारों ओर खामोशी छाई;
साँझ का तारा दिखा गगन में,
मुझको याद तुम्हारी आई!
-- सुप्रिया दूबे ©
PC - वाह रे हम!