कर्त्तव्यबोध

जानते हैं? शुरू से ही मेरी एक कमी रही है... मैं किसी के प्रति अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाती। मैं नहीं जता पाती कि मैं उससे कितना प्यार करती हूँ। लेकिन मैं कुछ कहती भले नहीं हूँ, पर सब समझती हूँ। क्या मुझे नहीं दिखता मेरे मम्मी-पापा मेरे लिए कितनी मेहनत करते हैं? मेरी मम्मी सुबह 5 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक जगती हैं। दिनभर काम करती रहती हैं। बिना हमको खिलाए वो खाना तक नहीं खातीं।
            इस उम्र में भी मेरे पापा रोज 26 किलोमीटर दूर मोटरसाइकिल चलाकर काम पर जाते हैं... यानि दिन भर में 52 किलोमीटर। क्या उनको थकान नहीं लगती होगी? क्या उनका मन नहीं करता होगा कि आज आराम कर लें, न जाएँ काम पर? आख़िर किसके लिए? हमारे लिए ही ना? साल-साल भर बीत जाता है वो अपने लिए एक शर्ट तक नहीं बनवाते। महीनों से घिसी हुई चप्पल पहन रहे हैं। क्यों? सिर्फ इसीलिए न ताकि अपनी जरूरतों से पहले वे हमारे 'शौक' पूरे कर सकें? हमारे लिए 10 हजार का फ़ोन खरीद सकें?
         ...और सिर्फ मेरे माता-पिता ही नहीं, दुनिया के हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए इसी तरह मेहनत करते हैं, चिंता करते हैं।
          यूँ तो जल्दबाजी मुझे पसंद नहीं... मगर जब मैं उनके बारे में सोचती हूँ तो मन करता है कितनी जल्दी अपने पैरों पर खड़ी हो जाऊँ! कितनी जल्दी उनके सपनों को और उन सपनों को जो मैंने उनके लिए देखे हैं, उन्हें पूरा कर पाऊँ!
        दोस्तों जिंदगी बहुत छोटी है, बिल्कुल मुट्ठी में बंद रेत की तरह। कब समय बीत जाता है पता ही नहीं चलता। मेरी और आपकी उम्र हो सकता है कम हो लेकिन हमारे माता-पिता उम्रदराज हो चुके हैं। हमारे पास वक़्त है अभी अपने सपनों को पूरा करने के लिए लेकिन उनके सपने अब हमसे हैं... इसलिए हमें जल्द ही कुछ करना होगा ताकि हम उन्हें अधिक से अधिक खुशियाँ दे पाएँ, उनके सपनों को पूरा कर पाएँ।
         जानते हैं उन्हें सबसे अधिक खुशी कब होगी? जब वे हमें हमारे सपनों को पूरा करते हुए देखेंगे, जब वे हमें सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते देखेंगे इसलिए जी-जान लगाकर पढ़िए। जो भी कर रहे हों पूरी मेहनत से करिए। जीवन में जो भी करना है जल्दी करिए क्योंकि आपकी सफलता का इंतजार आप से अधिक उन्हें है।
सुप्रिया दूबे ©
(तस्वीर में मम्मी और पापा)