वह उड़ता हुआ ठीक मेरे सामने आकर गिरा और मैं चलते-चलते रुक गई। मैंने उसे अपने हाथों में उठा लिया और उलट-पलटकर उसे देखने लगी। वह देखने में काफी जीर्ण लग रहा था। मानो वह अपनी आख़िरी साँसें ले रहा हो। वह जाते-जाते मुझसे कुछ कहना चाह रहा था कि सुनो! मैं रोजाना न जाने कितने ही लोगों को इस सड़क से गुजरते हुए देखता हूँ। मैं किसी के भी सामने गिरकर दम तोड़ सकता था और उसे इस बात की ख़बर तक न होती लेकिन मैं तुम्हारे सामने गिरा क्योंकि तुम मुझे बिल्कुल अपनी सी लगी।
मैंने मौसमों को बदलते हुए देखा है। गर्मी, जाड़ा, बरसात इन सबका सामना किया है लेकिन मैंने हालातों के सामने कभी हार नहीं मानी। मैं निरन्तर अपना काम करता रहा। आज मैं जाता हूँ लेकिन मेरी आत्मा को शांति ही मिलेगी। तुम्हारे जीवन में भी सुख-दुःख आएँगे। अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए कभी-कभी तुमको लगेगा कि अब बस और आगे जाना तुम्हारे बस का नहीं है लेकिन तुम उस वक़्त हार मत मानना। जीवन में हमेशा दूसरों की मदद करने की कोशिश करना, दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना और तुम पाओगी कि तुम्हें अपार खुशी मिल रही है।
यकीन मानो इस संसार में कोई किसी का नहीं है, सब अकेले ही आए हैं और अकेले ही चले जाएँगे, बस बची रह जाएँगी उनकी यादें और वह भी बस उन्हीं की जो यादगार काम कर जाएँगे, जो दूसरों के लिए जीकर जाएँगे।
तुम्हें जीवन में तरह-तरह के लोग मिलेंगे उनमें से कुछ बस अपना स्वार्थ साधने की कोशिश करेंगे, तुम्हें इन सबसे विचलित नहीं होना है। तुम अपना ध्यान बस अपने लक्ष्य पर लगाना। नकारात्मक लोगों से दूर रहना। कभी भी किसी दूसरे के लिए खुद को मत बदलना क्योंकि तुम जैसी भी हो... 'अद्वितीय' हो। जीवन में आदर्श तो बनाना लेकिन हूबहू किसी की तरह बनने की कोशिश मत करना, इससे तुम अपना वास्तविक स्वरूप खो दोगी।
बस यही कुछ बातें कहना चाहता था तुमसे। तुम सोच रही होगी मैं तुमसे यह सबकुछ क्यों कह रहा हूँ...तो वो इसलिए...कि तुमने मुझ गिरते हुए को अपने हाथों में उठा लिया। बस इतना काफ़ी है मेरे खुश होने के लिए। जीवन में छोटी-छोटी खुशियाँ ही मायने रखती हैं। कुछ बड़ा होने के इंतज़ार में हमें छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि खुशी बस मन की एक अवस्था है। हो सकता है कोई छोटी सी बात तुम्हें वो खुशी दे जाए जो कुछ बड़ा होने पर भी न मिले... तो बस हर बात में खुशियाँ तलाशने की कोशिश करना। अपने सपनों और अपने शौक को पूरा करने में खुद को इतना व्यस्त रखना कि किसी बात का दुःख मनाने के लिए तुम्हारे पास फुर्सत ही न रहे।
मेरी ये बातें याद रखना। अब जाता हूँ...हमेशा खुश रहो, मुस्कुराती रहो। और इतना कहकर उसने दम तोड़ दिया। मैंने उसे वहीं सड़क के किनारे रख दिया और अपने रस्ते चल पड़ी।
इस घटना के बाद कई दिनों तक मैं उस पत्ते के बारे में सोचती रही। मैं पछता रही थी कि मैंने उसे वहीं क्यों छोड़ दिया। मुझे उसे अपने साथ लाना चाहिए था। मैं उसे अपनी किसी किताब में रख सकती थी और समय के साथ उसमें होने वाले परिवर्तनों को देख सकती थी। एक समय बाद बस एक जाल-सा शेष रह जाता और मैं जब-जब उसे देखती, वह मुझे अहसास कराता कि यह जीवन नश्वर है।
© सुप्रिया दुबे
मैंने मौसमों को बदलते हुए देखा है। गर्मी, जाड़ा, बरसात इन सबका सामना किया है लेकिन मैंने हालातों के सामने कभी हार नहीं मानी। मैं निरन्तर अपना काम करता रहा। आज मैं जाता हूँ लेकिन मेरी आत्मा को शांति ही मिलेगी। तुम्हारे जीवन में भी सुख-दुःख आएँगे। अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए कभी-कभी तुमको लगेगा कि अब बस और आगे जाना तुम्हारे बस का नहीं है लेकिन तुम उस वक़्त हार मत मानना। जीवन में हमेशा दूसरों की मदद करने की कोशिश करना, दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना और तुम पाओगी कि तुम्हें अपार खुशी मिल रही है।
यकीन मानो इस संसार में कोई किसी का नहीं है, सब अकेले ही आए हैं और अकेले ही चले जाएँगे, बस बची रह जाएँगी उनकी यादें और वह भी बस उन्हीं की जो यादगार काम कर जाएँगे, जो दूसरों के लिए जीकर जाएँगे।
तुम्हें जीवन में तरह-तरह के लोग मिलेंगे उनमें से कुछ बस अपना स्वार्थ साधने की कोशिश करेंगे, तुम्हें इन सबसे विचलित नहीं होना है। तुम अपना ध्यान बस अपने लक्ष्य पर लगाना। नकारात्मक लोगों से दूर रहना। कभी भी किसी दूसरे के लिए खुद को मत बदलना क्योंकि तुम जैसी भी हो... 'अद्वितीय' हो। जीवन में आदर्श तो बनाना लेकिन हूबहू किसी की तरह बनने की कोशिश मत करना, इससे तुम अपना वास्तविक स्वरूप खो दोगी।
बस यही कुछ बातें कहना चाहता था तुमसे। तुम सोच रही होगी मैं तुमसे यह सबकुछ क्यों कह रहा हूँ...तो वो इसलिए...कि तुमने मुझ गिरते हुए को अपने हाथों में उठा लिया। बस इतना काफ़ी है मेरे खुश होने के लिए। जीवन में छोटी-छोटी खुशियाँ ही मायने रखती हैं। कुछ बड़ा होने के इंतज़ार में हमें छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि खुशी बस मन की एक अवस्था है। हो सकता है कोई छोटी सी बात तुम्हें वो खुशी दे जाए जो कुछ बड़ा होने पर भी न मिले... तो बस हर बात में खुशियाँ तलाशने की कोशिश करना। अपने सपनों और अपने शौक को पूरा करने में खुद को इतना व्यस्त रखना कि किसी बात का दुःख मनाने के लिए तुम्हारे पास फुर्सत ही न रहे।
मेरी ये बातें याद रखना। अब जाता हूँ...हमेशा खुश रहो, मुस्कुराती रहो। और इतना कहकर उसने दम तोड़ दिया। मैंने उसे वहीं सड़क के किनारे रख दिया और अपने रस्ते चल पड़ी।
इस घटना के बाद कई दिनों तक मैं उस पत्ते के बारे में सोचती रही। मैं पछता रही थी कि मैंने उसे वहीं क्यों छोड़ दिया। मुझे उसे अपने साथ लाना चाहिए था। मैं उसे अपनी किसी किताब में रख सकती थी और समय के साथ उसमें होने वाले परिवर्तनों को देख सकती थी। एक समय बाद बस एक जाल-सा शेष रह जाता और मैं जब-जब उसे देखती, वह मुझे अहसास कराता कि यह जीवन नश्वर है।
© सुप्रिया दुबे
