कम्बल

प्रेम में पड़ी हुई स्त्रियाँ
दिन में भी ओढ़ लेती हैं कम्बल;
कम्बल में निकले रोवें
उन्हें प्रतीत होते हैं
प्रिय के शरीर पर उगे रोंगटे के समान;
कम्बल से मिलने वाली गर्माहट
प्रिय के शरीर से निकलने वाली ऊष्मा है!

~ सुप्रिया दुबे ©