सुप्रिया दुबे Supriyaa Dubeyy
खून
एक समय
तुम्हारी ही तरह मैं भी
मानती थी
ऊँच-नीच
जात-पात
और एक दिन मैं पड़ गई बीमार
बहुत ज़्यादा बीमार
इतनी ज़्यादा
कि यदि समय रहते
नहीं चढ़ता मुझे 'खून'
तो आज मैं शेष न रहती
यह कहने के लिए
कि अब मैं नहीं मानती
ऊँच-नीच
जात-पात!
~ सुप्रिया दुबे ©
Newer Post
Older Post
Home