दोस्त बनकर
वो आया था मेरी ज़िंदगी में
हुआ कब प्यार
ना उसको है ख़बर, ना ही मुझे
है वो 'गोविंद' मेरा
और मैं हो गयी हूँ राधा
हैं लेते बाँट हर ग़म
मिलके दोनों आधा-आधा
भटकती राह हूँ जब
मैं कभी अर्जुन की तरह
वो बनकर सारथी कृष्णा
है करता मार्गदर्शन
थोड़ा सा है वो नटखट
पर वो समझदार भी है
हँसाता है, रुलाता है
वो मेरा प्यार भी है
करूँ जो याद उसे
मैं हूँ मीरा, वो कन्हैया
करूँ जो प्रेम उसे
राधिका मैं, कृष्ण है वो
रहा वो एक ही हरदम
हैं बदले रूप मैंने
है मेरी कामना हो जाऊँ
रुक्मिणी अब मैं!
~ सुप्रिया दुबे (१९/०६/२०२०)
On behalf of my friend Govind's beloved...
Coz she wanted a poem based on their friendship on his birthday and today it is. I have tried my best to get into her feelings.
Happy Birthday Gobhiii...
वो आया था मेरी ज़िंदगी में
हुआ कब प्यार
ना उसको है ख़बर, ना ही मुझे
है वो 'गोविंद' मेरा
और मैं हो गयी हूँ राधा
हैं लेते बाँट हर ग़म
मिलके दोनों आधा-आधा
भटकती राह हूँ जब
मैं कभी अर्जुन की तरह
वो बनकर सारथी कृष्णा
है करता मार्गदर्शन
थोड़ा सा है वो नटखट
पर वो समझदार भी है
हँसाता है, रुलाता है
वो मेरा प्यार भी है
करूँ जो याद उसे
मैं हूँ मीरा, वो कन्हैया
करूँ जो प्रेम उसे
राधिका मैं, कृष्ण है वो
रहा वो एक ही हरदम
हैं बदले रूप मैंने
है मेरी कामना हो जाऊँ
रुक्मिणी अब मैं!
~ सुप्रिया दुबे (१९/०६/२०२०)
On behalf of my friend Govind's beloved...
Coz she wanted a poem based on their friendship on his birthday and today it is. I have tried my best to get into her feelings.
Happy Birthday Gobhiii...
