मैंने साल की शुरुआत में ही सोचा था कि इस साल पौधे लगाऊँगी। लॉकडाउन के चलते अब तक मेरा ये प्लान ताख पे धरा रहा, लेकिन आज जब किसी जरूरी काम से घर से बाहर निकलना हुआ तो लौटते समय मैंने रास्ते में ये तीन पौधे खरीद लिए। और फिर घर आकर इन्हें गमले में स्थापित कर दिया। घर के सामने वाले खेत से मिट्टी मिल गई और सामने वाले घर में गायें हैं तो वहाँ से मैंने पुराना गोबर इकट्ठा किया और उसे ही खाद के रूप में इस्तेमाल किया।
हमने गाँव वाले घर पे खूब सारे फूल-पौधे लगा रखे मगर पढ़ाई के सिलसिले में जबसे ख़लीलाबाद आना हुआ तबसे पौधों से दूरी सी बन गई थी लेकिन अब मेरे इस शौक ने एक बार फिर करवट ली है।
अब इन प्यारे दोस्तों की देख-रेख की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। नज़रें हर ओर से हटकर इनके ऊपर ही खिंची जा रही हैं। मन को एक अलग ही सुकून मिल रहा है इन्हें देखकर। हालाँकि मैं इन्हें अपनी मनचाही जगहों पर नहीं रख पायी क्योंकि यहाँ बंदरों का बहुत आतंक है फिर भी ये जहाँ रखे हैं, सुंदर लग रहे हैं। जबसे ये घर में आये हैं मुझे हवा भी पहले से काफी शुद्ध लगने लगी है।
~ सुप्रिया दुबे
हमने गाँव वाले घर पे खूब सारे फूल-पौधे लगा रखे मगर पढ़ाई के सिलसिले में जबसे ख़लीलाबाद आना हुआ तबसे पौधों से दूरी सी बन गई थी लेकिन अब मेरे इस शौक ने एक बार फिर करवट ली है।
अब इन प्यारे दोस्तों की देख-रेख की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। नज़रें हर ओर से हटकर इनके ऊपर ही खिंची जा रही हैं। मन को एक अलग ही सुकून मिल रहा है इन्हें देखकर। हालाँकि मैं इन्हें अपनी मनचाही जगहों पर नहीं रख पायी क्योंकि यहाँ बंदरों का बहुत आतंक है फिर भी ये जहाँ रखे हैं, सुंदर लग रहे हैं। जबसे ये घर में आये हैं मुझे हवा भी पहले से काफी शुद्ध लगने लगी है।
~ सुप्रिया दुबे
