उसे भी प्यार है मुझसे मुझे मालूम है लेकिन
वो खुद इकरार करता तो मजा कुछ और ही होता
वो खुद इकरार करता तो मजा कुछ और ही होता
है सुनता चाव से यूँ तो मेरी हर बात वो लेकिन
जो अपने दिल की भी सुनता, मजा कुछ और ही होता
जो अपने दिल की भी सुनता, मजा कुछ और ही होता
कभी जब रूठती हूँ मैं, ख़फ़ा होती हूँ उससे जब
कभी मुझको मना लेता, मजा कुछ और ही होता
कभी मुझको मना लेता, मजा कुछ और ही होता
हँसाता है, रुलाता है, वो हर पल याद आता है
उसे भी याद मैं आती, मजा कुछ और ही होता
उसे भी याद मैं आती, मजा कुछ और ही होता
वो कहता है कि चलना होगा तुमको अब अकेले ही
कभी ये बात ना कहता, मजा कुछ और ही होता
कभी ये बात ना कहता, मजा कुछ और ही होता
ये रस्ते खूबसूरत हैं मगर कुछ है कमी अब भी
वो मेरे साथ गर चलता, मजा कुछ और ही होता
वो मेरे साथ गर चलता, मजा कुछ और ही होता
वो मेरा हो नहीं सकता चलो फिर ठीक है लेकिन
किसी का भी ना होता तो मजा कुछ और ही होता
किसी का भी ना होता तो मजा कुछ और ही होता
~ सुप्रिया दुबे