जहाँ मैं बराबर आप

“दूरियाँ प्यार को और भी बढ़ा देती हैं” आप ही तो कहते हैं और सही ही कहते हैं। मैंने देखा है आप जब-जब मुझसे दूर हुए हैं, आपके लिए मेरा प्यार और भी बढ़ गया है। आप जब मुझसे दूर होते हैं तो मुझे आपको याद करने का मौका मिल जाता है और तब मैं आपको याद करके खूब रोती हूँ। मुझे आपको याद करना पसंद है। मैं खुद चाहती हूँ कि आप थोड़े दिनों के लिए मुझसे दूर हो जाइए ताकि मैं आपको याद करके खूब रो सकूँ।

उस दिन मैंने आपसे बिना मतलब का झगड़ा कर लिया। आपको आश्चर्य हुआ होगा मेरे बर्ताव पर। मुझे खुद आश्चर्य हुआ अपने ऊपर कि मैं आपसे झगड़ा कैसे कर सकती हूँ, वो भी बिना बात के! यह पहली बार था जब हमारे बीच झगड़ा हुआ हो। आपको शायद ना पता हो लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आई थी। मैं अपने बर्ताव पर पछता रही थी। मेरी आँखों के कोर भींगे हुए थे। अगले दिन भी सारा दिन रोती रही थी। मगर मैंने जान बूझकर ऐसा किया था। मैं आपसे दूर हो जाना चाहती थी। कहीं न कहीं आपने ही मुझे दूरी की आदत लगा दी है और अब जब वही दूरी मुझे नहीं मिलती तो मैं खुद कुछ ऐसा कर बैठती हूँ कि आप मुझसे दूर हो जाइए।

मेरा प्यार भी बड़ा अजीब है ना? जहाँ बाकी सबको एक पल की भी जुदाई बर्दास्त नहीं होती वहीं मैं खुद जुदाई के रास्ते बनाती हूँ। मुझे आपको याद करना आपके पास होने से भी कहीं अधिक पसंद है। मैं कभी नहीं चाहती कि मेरा मन आपसे भर जाए इसलिए मैं कभी-कभी आपसे दूर हो जाती हूँ और शायद आप भी इसीलिए मुझसे दूर हो जाते हैं। हमारा स्वभाव एक-दूसरे से कितना मिलता है ना! लगता है जैसे दोनों दो न हों बल्कि एक ही हों। आप भी तो कहते हैं “मेरा और तुम्हारा नाम जैसे एक ही व्यक्ति के दो नाम हों”

मैंने कभी आपसे प्रेम के बदले प्रेम की कामना नहीं की है। और न ही कभी यह जानने की कोशिश की है कि आप मुझसे प्रेम करते भी हैं या नहीं। मैं तो बस अपने मन की जानती हूँ। मैंने आप पर कभी अधिकार नहीं जताया बल्कि हमेशा आपको स्वतंत्र छोड़ा है। आप जब बाकी लड़कियों से हँसी-मजाक करते हैं तो मुझे जलन भी नहीं होती है। कोई आपको मुझसे छीन भी ले मगर मेरे दिल से आपको कोई अलग नहीं कर सकता।

अभी तो हमारा सारा जीवन पड़ा है। हो सकता है परिस्थितिवश मेरे जीवन में कभी कोई और आ जाए लेकिन मेरे दिल में आपके सिवा कभी कोई और नहीं आ सकता। हाँ ये सम्भव है कि आप कल किसी और के हो जाइए लेकिन यकीन मानिए जितना प्यार मैं आपसे करती हूँ कोई और न कर सकेगा। मेरी हर प्रार्थना में आप होंगे। मैं जो भी व्रत रखूँगी, जिस भी मंदिर में जाऊँगी, आपके लिए, आपकी सफलता के लिए भगवान से प्रार्थना करूँगी।

और एक बात, आप हँसते-हँसाते मुझसे हमेशा के लिए दूर हो जाइए, मैं आपके साथ बिताए पलों को याद करते हुए सारा जीवन बिता दूँगी, लेकिन अगर आप मुझसे नाराज़ होकर अलग हुए तो शायद ही कोई ऐसा दिन बीतेगा जिस दिन मैं खुद को कोसूँगी नहीं, जिस दिन मैं रोऊँगी नहीं। मैं सब कुछ सह सकती हूँ लेकिन आपकी नाराज़गी नहीं सह पाऊँगी।

मैं आपको जल्दी कॉल या मैसेज नहीं करती, शायद आपको लगता होगा कि मुझे आपकी याद नहीं आती लेकिन सच मानिए तो मैं आपके मैसेज और कॉल का इंतज़ार करती हूँ। मुझे तब ज़्यादा अच्छा लगता है जब यह पहल आप करते हैं। मैं चाहती हूँ कि जैसे मैं आपको याद करती हूँ वैसे ही आपको मेरी याद आए। आपके एक मैसेज पे मेरा मुरझाया चेहरा ऐसे खिल उठता है कि उस समय कोई भी मेरे सारे दाँत आसानी से गिन ले।

मुझे जब भी आपकी बहुत याद आती है मैं आपका पसंदीदा गाना सुनने लगती हूँ और उस गाने के एक-एक शब्द में मैं आपको महसूस कर पाती हूँ। उस वक्त मैं आपको अपने इर्द-गिर्द पाती हूँ। आप सचमुच बहुत मासूम हैं। मैं क्या कोई भी आपसे जुड़ जाएगा। मैं जब आपको देखती हूँ तो सोचने लगती हूँ कि अगर हर लड़के में ऐसी ही मासूमियत आ जाए तो लड़कियाँ निडर होकर रात में भी बाहर घूम सकें।

मैं आपसे कभी नाराज़ नहीं हो सकती चाहे आप मुझे कुछ भी कह दीजिए। वो तो कभी-कभी बस आपको परेशान करने के लिए नखरे दिखाती हूँ। मुझे पता है आप मुझसे गुस्सा नहीं हैं, आख़िर आप मेरे ही जैसे हैं। और अगर  गुस्सा हैं तो बस एक बार शुरू से वो सारी बातें याद कर लीजिए जो हमारे बीच हुई थीं, वो बातें याद कर लीजिए जिनपर हम एक साथ हँसे थे, यकीन मानिए उसके बाद आपका गुस्सा छू मंतर हो जाएगा। ना यकीन आए तो कर के देख लीजिए।

(मैंने सुना है कहने से प्रेम हल्का हो जाता है और इसीलिए मैंने ये सब बातें आपसे नहीं कहीं बल्कि लिखना ही ठीक समझा। बहुत सम्भव है कि मेरा ये लिखा आप तक कभी पहुँचे ही न लेकिन ये सारी बातें लिखकर मैं खुद को हल्का महसूस कर पा रही हूँ।)

सुप्रिया दुबे ©

नोट -  उपर्युक्त सभी बातें काल्पनिक हैं।