अपने गुरु (श्री विजय कृष्ण ओझा) जी के सुझाव पर इस नवरात्रि मैंने श्री रामचरितमानस का पाठ प्रारम्भ किया जो कल नवमी के दिन सम्पन्न हुआ और संयोग से आज विजयादशमी के दिन अमृतलाल नागर द्वारा लिखित रामचरितमानस के प्रणेता गोस्वामी तुलसीदास जी की जीवनी भी पढ़कर सम्पन्न कर ली। रामचरितमानस पढ़ने के साथ-साथ इसके लिखे जाने के पीछे की कहानी पढ़ना अत्यंत रोचक रहा। इस प्रकार पाठ करने में और भी आनंद आया।
"मानस का हंस" नामक इस पुस्तक में नागर जी ने तुलसीदास जी के जीवन-चरित्र का बहुत ही भावपूर्ण चित्रण किया है। इसके लिए उन्होंने अवधी मिश्रित खड़ी बोली का प्रयोग किया है। हर सनातनी द्वारा निश्चित रूप से इन दोनों पुण्य पुस्तकों का पठन किया ही जाना चाहिए। धार्मिक दृष्टि के अलावा साहित्यिक दृष्टिकोण से भी ये दोनों पुस्तकें अनुपम हैं।
~ सुप्रिया दुबे ©
"मानस का हंस" नामक इस पुस्तक में नागर जी ने तुलसीदास जी के जीवन-चरित्र का बहुत ही भावपूर्ण चित्रण किया है। इसके लिए उन्होंने अवधी मिश्रित खड़ी बोली का प्रयोग किया है। हर सनातनी द्वारा निश्चित रूप से इन दोनों पुण्य पुस्तकों का पठन किया ही जाना चाहिए। धार्मिक दृष्टि के अलावा साहित्यिक दृष्टिकोण से भी ये दोनों पुस्तकें अनुपम हैं।
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